औषधीय खेती के अग्रणी किसान

झांसी के पाठाकरका गांव के किसान पुष्पेंद्र सिंह यादव ने लगभग 10 साल पहले परंपरागत खेती छोड़कर तुलसी (Holy Basil) की औषधीय खेती शुरू की। छिटपुट क्षेत्र में कामयाब शुरुआत ने उन्हें पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में अग्रणी बना दिया।

चुनौतियाँ

पारंपरिक फसलों से सीमित आय

बाजार की असमान पहुंच

तकनीकी जानकारी और संसाधनों की कमी

नवाचार

तुलसी की खेती ने मात्र 2.5 महीनों में प्रति एकड़ लगभग ₹60,000 की आय दी—जो पारंपरिक फसलों से कहीं अधिक लाभकारी था।

उन्होंने 1,072 किसानों को जोड़कर बुंदेलखंड औषधि Farmer Producer Organization (FPO) की स्थापना की — यह संगठन अब 40,132 एकड़ क्षेत्र में संचालन करता है।

FPO ने ₹29 लाख की लागत से एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की, जहां तुलसी के तेल और सुखाई गई पत्तियों का उत्पादन होता है। इसमें 33% सब्सिडी भी शामिल थी।

प्रभाव

किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

सामूहिक संगठन (FPO) के माध्यम से बाजार, संसाधन और तकनीकी सहायता को सरल बनाया गया।

कृषि पद्धति में पर्यावरण- अनुकूल बदलाव — कम संसाधन खर्च और अधिक स्थिरता।

कहानी का सारांश
पुष्पेंद्र की कहानी “एक किसान, एक विचार” से शुरू होती है और “एक क्षेत्र को प्राकृतिक कृषि के रास्ते पर लाना” तक पहुँ जाती है। उन्होंने दिखा दिया कि किस तरह से व्यक्तिगत पहल को सामूहिक संगठन और तकनीकी नवाचार से जोड़कर विशाल परिवर्तन लाया जा सकता है।

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