प्राकृतिक खेती का संकल्प)

श्याम बिहारी गुप्ता झांसी में लंबे समय से प्राकृतिक खेती और मिट्टी-पानी संरक्षण पर कार्यरत हैं। बुंदेलखंड की पथरीली मिट्टी, जल संकट और किसान की न्यूनतम आय की चुनौतियाँ पहचानकर उन्होंने एक सरल लेकिन प्रभावशाली मॉडल बनाया: “एक किसान – एक गाय”।

चुनौतियाँ

क्षेत्र में पानी की भारी कमी और खेती की अक्षमताएं

रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में गिरावट

छुट्टा पशुओं की समस्या से ग्रामीण जीवन में असुविधा

नवाचार

प्रत्येक किसान को एक गाय रखने की योजना, जिससे गोबर, गोमूत्र और पंचगव्य से जैविक खाद और ऊर्जा (बायोगैस) प्राप्त हो सके — खेती में लागत में काफ़ी कमी और पैदावार में सुधार हुआ।

इससे साथ ही छुट्टा पशुओं का नियंत्रण भी हुआ एवं गांवों में स्थायी कृषि पद्धतियाँ बनीं।

प्रभाव

किसानों की लागत में कमी और आय में सुधार — रसायनों पर निर्भरता घटने लगी।

मिट्टी और पर्यावरण को संरक्षित करने वाला मॉडल — जैविक जीवनचक्र को बढ़ावा मिला।

उनका योगदान राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त हुआ — श्याम बिहारी गुप्ता को उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया।

कहानी का सारांश
श्‍याम बिहारी की कहानी “प्राकृतिक खेती” के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है — गाय और किसान को एक जीवनदायिनी भूमिका में प्रस्तुत करते हुए। यह एक स्थानीय पहल है जिसका व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव रहा।

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