12 वर्षों की मेहनत हुई सफल : पोषक और उच्च उत्पादक जौ की नई किस्म – ‘पंत जो 1106’
नवीन कृषि
उत्तराखंड स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने लगातार 12 वर्षों के शोध एवं परीक्षण के बाद जौ की एक नई, पोषक तत्वों से भरपूर और उच्च उत्पादक किस्म ‘पंत जो 1106’ (यूपीबी 1106) विकसित की है।
किस्म की प्रमुख विशेषताएँ
उच्च उत्पादन क्षमता – पंत जो 1106 से प्रति हेक्टेयर 52–54 क्विंटल तक की उपज प्राप्त हो सकती है।
पौष्टिकता – इसमें औसतन 12% से अधिक प्रोटीन और 64% स्टार्च पाया गया है, जिससे यह आहार की दृष्टि से श्रेष्ठ है।
अनुकूलता – यह किस्म उत्तर भारत सहित पूर्वोत्तर राज्यों की जलवायु परिस्थितियों के लिए भी उपयुक्त है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता – इसमें झुलसा (ब्लाइट) जैसी प्रमुख बीमारियों के प्रति अच्छा प्रतिरोध देखा गया है।
कम अवधि वाली फसल – यह किस्म लगभग 137 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसान अगली फसल समय पर बो सकते हैं।
किसानों के लिए लाभ
इस किस्म से पारंपरिक किस्मों की तुलना में 10–12 प्रतिशत अधिक उत्पादन मिल सकता है।
इसमें दाने बड़े और भरपूर आते हैं, जिससे मंडी में अच्छा भाव मिल सकता है।
मानव आहार के साथ-साथ यह किस्म पशुओं के चारे के लिए भी उपयोगी है।
कम समय और कम लागत में अधिक लाभ देने वाली यह किस्म किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक होगी।
शोध की पृष्ठभूमि
‘पंत जो 1106’ किस्म को विकसित करने में पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को 12 वर्षों का लंबा समय लगा।
विभिन्न मौसमों और राज्यों में परीक्षण (ट्रायल) करने के बाद यह पाया गया कि यह किस्म न केवल उत्तर भारत बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी उपयुक्त है।
मान्यता और सम्मान
इस किस्म का अनावरण केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा किया गया। उन्होंने इसे किसानों के लिए उपयोगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ‘पंत जो 1106’ जौ उत्पादन की अग्रणी किस्म बन जाएगी।
